नैनीताल : संधि पूजा में 108 कमल के फूल, दूर्वा घास, जले दीपक एवं वेलपत्री चढ़ाकर एवं कद्दू काटकर माँ दुर्गा एवं देवी देवताओं की गई पूजा अर्चना।

माँ कुष्मांडा देवी मैया को प्रिय है कद्दू यानी सीताफल। डॉक्टर ललित तिवारी।
रिपोर्ट। ललित जोशी।
नैनीताल। सरोवर नगरी माँ नैना देवी मंदिर में सर्वजनिन दुर्गा पूजा कमेटी के तत्वाधान में आयोजित दुर्गा पूजा महोत्सव में मां नैना देवी मंदिर परिसर में नवमी के दिन विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ नजर आई। महा अष्टमी-नवमी,के पावन अवसर पर 108 कमल पुष्प,दूर्वा दिये,बेलपत्री से मां दुर्गा का अभिषेक किया गया। इसमें 108 दिये की आरती महिसासुर मर्दिनी को 108 कमल पुष्प, 108 दूबा ,108 बेल पत्री अर्पित की गई मुख्य पुजारी शुभ चक्रवर्ती के नेतृत्व में पूजन किया गया। दुर्गा पूजा अवसर पर कद्दू को काटकर पूजा अर्चना की गई। इस मौके पर एक मुलाकात में डीएसबी कालेज के विभागाध्यक्ष डॉक्टर ललित तिवारी ने हमारे जिला संवाददाता ललित जोशी को बताया कि माँ दुर्गा पूजा में सब्जी बनाने वाले कद्दू को क्यों काटा जाता है। डॉक्टर तिवारी ने कहा माँ दुर्गा के नो रूप है जिनकी आराधना व पूजा अलग अलग रुपों
में की जाती है ।जिसमें माँ कुष्मांडा देवी मैया को कद्दू पसंद है। इसलिए अष्टमी नवमी को कद्दू काटकर चढ़ाया जाता है। उन्होंने कहा कद्दू चढ़ाने का तात्पर्य यह भी है यह लोभ, मोह, अहंकार त्याग करता है साथ ही नकारात्मक ऊर्जा को बाहर करता है। उन्होंने बताया माँ कुष्मांडा देवी मैया कद्दू के चढ़ावे से खुश होकर अपने भक्तों को एवं श्रदालुओं को अपना आशीर्वाद प्रदान करती है।जिससे देश, प्रदेश, जिला, कस्बों, क्षेत्रों में खुशहाली रहे। डॉक्टर ललित तिवारी ने कहा कद्दू को सीता फल भी कहा जाता है साथ ही इसकी सब्जी बनाई जाती है जो भरपूर विटामिन से युक्त होती है।
मां नैना देवी मंदिर में इन दिनों श्रदालुओं का हर समय तांता लगा हुआ है
नयना देवी मंदिर में हवन यज्ञ, कन्या पूजन के बाद भंडार किया गया। मुख्य पुजारी शुभ चक्रवती के नेतृत्व में महानवमी पूजन किया गया। इस दौरान सर्वजनीन दुर्गा पूजा कमेटी के तमाम सदस्यों मौजूद रहे।
