ताज ख़ान
नर्मदापुरम//
दीपावली का पर्व अपनी पूरी चमक और उत्साह के साथ होना है,बाज़ारों में भीड़ उमड़ पड़ी है,लेकिन इस पूरे मामले में वरिष्ठ समाज सेवी,पूर्व ज़िला पंचायत अध्यक्ष भवानी शंकर शर्मा की पैनी नज़र और तीखे सवालों से त्योहारों की रंगत के बीच शहर में अफ़सरशाही के एक फैसले ने ऐसा ‘ट्रैफिक जाम’ खड़ा कर दिया है कि आम जनता राहत की जगह आफ़त महसूस कर रही है।अनुविभागीय अधिकारी (SDM) और सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किए गए संयुक्त फरमान जिसमें 4 नवंबर से 9 नवंबर तक बाजार क्षेत्र का यातायात पूरी तरह ठप करने का आदेश दिया गया है,पर अब जन-आक्रोश का गुबार फूट पड़ा है।वरिष्ठ समाजसेवी भवानी शंकर शर्मा ने इस प्रशासनिक फरमान की धज्जियाँ उड़ाते हुए इसे सीधे तौर पर ‘तुगलकी आदेश’ करार दिया है। उन्होंने अफ़सरों के इस फैसले पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि सिविल लाइन के शांत और सुविधायुक्त बंगलों में बैठने वाले अफसरों को पुराने शहर की जनता का दर्द समझ ही नहीं आ रहा।
दीपावली 3 दिन की और नाकेबंदी हफ्ते भर की -भवानी शंकर शर्मा।
भवानी शंकर शर्मा ने साफ़ शब्दों में अफ़सरशाही को आईना दिखाते हुए कुछ तीखे सवाल दागे हैं।
1-3 से 4 किलोमीटर की पैदल दौड़:बाजार बंद होने के बाद पुराने शहर के निवासी अपने घर कैसे पहुँचेंगे?कलेक्ट्रेट,जिला न्यायालय,कमिश्नर ऑफिस और रजिस्ट्री दफ़्तर जाने वाले क्या रोज़ 4 किलोमीटर पैदल नापेंगे?
2-अतिक्रमणकारियों की चाँदी:पहले दीपावली पर सिर्फ 3 दिन कसेरा बाजार,सराफा और हलवाई चौक पर थोड़ी परेशानी होती थी,फिर भी पहिए घूमते रहते थे। लेकिन इस बार पूरे 1 हफ्ते का बंद का आदेश देकर अतिक्रमणकारियों के दुस्साहस को खुली छूट दे दी गई है।
3-खाली सड़कों पर भी बैरिकेड का पहरा:आदेश इंदिरा चौक से हलवाई चौक तक का था,लेकिन पुलिसिया मुस्तैदी का आलम यह रहा कि बुधवार और गुरुवार को गांधी प्रतिमा और एकता चौक पर बेवजह बैरिकेड ठोक दिए गए,जहाँ दूर-दूर तक भीड़ का नामो-निशाँ नहीं था। उन्होंने कहा कि साहब लोग खुद सिविल लाइन के आलीशान माहौल में रहते हैं,इसलिए उन्हें आम नागरिक की हुज्जत का अंदाज़ा नहीं है।त्यौहारों पर बंद कमरे में फरमान सुनाने के बजाय जनप्रतिनिधियों,यातायात समिति और गणमान्य नागरिकों को बैठाकर रास्ता निकाला जाना चाहिए।
सड़कों पर सन्नाटा,जनता में भारी घमासान।
श्री शर्मा ने कहा पुराने शहर के लोग अपने ही घर जाने के लिए कोरीघाट की तंग गलियों से होकर चक्कर काटने को मजबूर हैं।भवानी शंकर शर्मा के इस कड़े रुख के बाद अब पूरा शहर एक ही सुर में पूछ रहा है”क्या त्यौहार की आड़ में आम जनता का रास्ता बंद करना ही मुस्तैद प्रशासन की निशानी है?अब देखना यह होगा कि भवानी शंकर शर्मा के इस तीखे कटाक्ष और जनहित की आवाज़ के बाद क्या प्रशासन अपनी हठधर्मिता छोड़कर सड़कों पर यातायात को सुगमता से चलने देगा या फिर जनता यूँ ही ‘बैरिकेड्स’के चक्कर काटती रहेगी।

