88 करोड़ पानी पानी,फिर भी जनता प्यासी,इटारसी नगर पालिका की नाकामी से हफ्ते में एक दिन जल कटौती की तैयारी,क्या फ़िर शुरू होगी टैंकर पॉलिटिक्स।

ताज ख़ान
इटारसी//

//जल गंगा संवर्धन अभियान का निकला ‘जनाज़ा’,शहर का एक भी कुआं या बावड़ी नहीं संवरी

//करोड़ों की जलावर्धन और अमृत 2.0 योजनाएं काग़ज़ों में सिमटीं,पार्षद अमित कापरे ने खोली परिषद की पोल

.गुरुवार को इटारसी नगर पालिका का साधारण व्यापक सम्मेलन अपने पारंपरिक और ढुलमुल अंदाज में संपन्न हुआ। विधायक और नगर पालिका अध्यक्ष की मौजूदगी में ‘दरबारीनुमा’ माहौल के बीच शहर के विकास का दावा करने वाली कई योजनाओं को औपचारिकता निभाते हुए पारित कर दिया गया।अधिकांश पार्षद और सभापति चाय-नाश्ते के साथ सत्ताधीश से आशीर्वाद की मुद्रा में दिखे,लेकिन इसी सुस्ती के बीच वार्ड 16 के निर्भीक पार्षद अमित कापरे ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया।जो भूमिका विपक्ष के नेता को(नेता  प्रतिपक्ष)निभानी चाहिए थी,वह काम पार्षद अमित कापरे ने किया।उन्होंने परिषद में आगामी गर्मी के दौरान हफ्ते में एक दिन ‘पानी सप्लाई बंद'(ड्राई डे) रखने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए इसे नगर पालिका का “कलेक्टिव फेलियर” (सामूहिक विफलता) करार दिया।

₹88 करोड़ की योजनाएं किस कचरे के डिब्बे में गईं?

अमित कापरे ने तीखा विरोध करते हुए कहा कि जब शहर के पास ₹24.54 करोड़ की सितारों से सजी ‘जलावर्धन योजना’,केंद्र सरकार की ₹36 करोड़ की ‘अमृत 2.0 योजना’, मुख्यमंत्री पेयजल योजना और हासलपुर से ₹28 करोड़ की लागत से पानी लाने के प्रस्ताव मौजूद हैं, तो फिर शहर पानी की बूंद-बूंद के लिए मोहताज क्यों है?इन भारी-भरकम बजट वाली योजनाओं के बावजूद जनता पर ‘जल कटौती’ थोपना प्रशासनिक नाकामी की पराकाष्ठा है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अभियान का उड़ाया मखौल।

यह स्थिति दर्शाती है कि स्थानीय नगर पालिका अपने ही शीर्ष नेतृत्व के आदेशों को ठेंगे पर रखती है।मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने 19 मार्च 2026 से 30 जून 2026 तक पूरे प्रदेश में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ चलाया था। उद्देश्य था-कुएं,बावड़ी और तालाबों जैसे पारंपरिक जल स्रोतों का जीर्णोद्धार करना ताकि भू-जल स्तर बना रहे।इटारसी और नर्मदापुरम में इस अभियान के नाम पर सिर्फ लाव-लश्कर के साथ प्रचार-प्रसार का ढोंग रचा गया।धरातल पर एक भी प्राकृतिक कुएं या बावड़ी को रीस्टार्ट नहीं किया गया।पिछले साल तो कम से कम कुओं पर पुताई कर औपचारिकता पूरी की गई थी,इस साल तो वह भी नसीब नहीं हुई।

सूखाग्रस्त हालात में अब ‘टैंकर राजनीति’ की तैयारी।

इस वर्ष वर्षा कम होने के कारण जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की कवायद चल रही है।आने वाले दिनों में पूरा क्षेत्र भीषण जल संकट से त्राहिमाम करेगा।ऐसे में सत्ता पक्ष अपनी नाकामियों को छुपाएगा और विपक्ष हमेशा की तरह ऐन वक्त पर राजनीति की रोटियां सेकेगा।आगामी चुनावी वर्ष को देखते हुए जल्द ही सोशल मीडिया पर “टैंकर राजनीति”और “दिखावे की समाजसेवा” का दौर शुरू होगा।लेकिन असल सवाल वही कायम है—करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी इटारसी की प्यासी जनता का कसूरवार कौन।

Similar Posts

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments
error

Enjoy this blog? Please spread the word :)