ताज ख़ान
इटारसी//
रेलवे के भीतर सोशल मीडिया पर की गई एक कथित टिप्पणी ने अब कानूनी और सामाजिक विवाद का रूप ले लिया है।वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ के भोपाल मंडल के संगठन सचिव प्रीतम तिवारी ने इटारसी के गुड्स गार्ड मनीष भगत को एक कानूनी नोटिस भेजकर ₹50/पचास लाख के मानहानि का दावा ठोका है।इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने के बाद से ही रेल प्रशासन और कर्मचारी संगठनों के बीच हड़कंप मचा हुआ है।
क्या है पूरा मामला?
जबलपुर जोन के अंतर्गत भोपाल मंडल के संगठन सचिव प्रीतम तिवारी ने अपने वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक शर्मा के माध्यम से यह नोटिस जारी किया है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि गुड्स गार्ड मनीष भगत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डिप्टी सीटीआई और प्रतिष्ठित मजदूर संघ के खिलाफ अत्यंत अपमानजनक और गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियां पोस्ट की थीं,जिससे संगठन और पदाधिकारियों की छवि धूमिल हुई है।
नोटिस में दी गई 7 दिन की ‘डेडलाइन’।
वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक शर्मा के अनुसार,नोटिस में मनीष भगत के सामने दो कड़ी शर्तें रखी गई हैं,जिन्हें 7 दिनों के भीतर पूरा करना अनिवार्य है।
सार्वजनिक लिखित माफी।
1:मनीष भगत को वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ और स्वयं प्रीतम तिवारी से लिखित रूप में सार्वजनिक माफी मांगनी होगी।
2:पोस्ट को हटाना।
सोशल मीडिया पर डाली गई सभी विवादित और अपमानजनक पोस्टों को तत्काल प्रभाव से डिलीट करना होगा।
चेतावनी:
यदि निर्धारित समय सीमा (7 दिन) के भीतर इन शर्तों को पूरा नहीं किया गया,तो इटारसी न्यायालय में आपराधिक मानहानि का प्रकरण दर्ज कराने के साथ-साथ ₹50 लाख की दीवानी मानहानि (Civil Defamation) का मुकदमा भी दायर किया जाएगा।
अब सामाजिक स्तर पर भी छिड़ी जंग।
यह मामला सिर्फ रेलवे के आंतरिक गलियारों तक ही सीमित नहीं रहा,बल्कि अब इसमें सामाजिक संगठन भी कूद पड़े हैं।अधिवक्ता अशोक शर्मा ने बताया कि समय पर संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में न केवल अदालती कार्रवाई की जाएगी,बल्कि सामाजिक स्तर पर भी कड़ा विरोध दर्ज कराया जाएगा।सर्व ब्राह्मण समाज,नर्मदापुरम के वरिष्ठ जन और सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र ओझा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही थाना प्रभारी और एसपी नर्मदापुरम को इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपकर सख्त कार्रवाई की मांग करेगा।
संगठन का दबदबा और दूसरे पक्ष का मौन।
उल्लेखनीय है कि वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ, जबलपुर जोन का एकमात्र मान्यता प्राप्त और सबसे प्रभावी संगठन है।ऐसे में संगठन के बड़े पदाधिकारी से जुड़ा यह विवाद पूरी रेलवे बेलारूसी में चर्चा का विषय बना हुआ है।फिलहाल इस पूरे मामले पर दूसरे पक्ष यानी गुड्स गार्ड मनीष भगत की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।अब देखना यह होगा कि क्या मनीष भगत बैकफुट पर आकर माफी मांगते हैं या यह विवाद न्यायालय की चौखट तक पहुंचता है।

