ताज खान
इटारसी//
इटारसी का नया बस स्टैंड क्या शिफ्ट हुआ,सियासी गलियारों में भूचाल आ गया!इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब मैदान में बीजेपी के कद्दावर विधायक डॉ.सीतासरन शर्मा और नगर पालिका अध्यक्ष पंकज चौरे की जोड़ी हो,तो बड़े-बड़े सियासी दिग्गजों के तेवर भी ठंडे पड़ जाते हैं।इस बार हालात ये हैं कि विधायक के एक ही दांव ने कांग्रेस के पूरे कुनबे को बेनकाब कर दिया है,और संगठन की अंदरूनी कलई खुलकर सामने आ गई है।
विधायक का मास्टरस्ट्रोक और कांग्रेस की ‘चुप्पी’।
चार दिन पहले इटारसी के बस स्टैंड को पुरानी इटारसी में पूरी ताकत के साथ शिफ्ट कर दिया गया।व्हाट्सएप ग्रुपों पर क्रांति लाने वाले कुछ छोटे-बड़े कांग्रेसी नेताओं और खुद जिलाध्यक्ष शिवाकांत “गुड्डन” पांडे ने सोशल मीडिया पर विरोध के सुलगते अंगारे जरूर छोड़े थे और ‘आर-पार की लड़ाई’ का बड़ा ऐलान भी किया था।लेकिन,जब मैदान में खुद विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा उतरे और दो टूक अंदाज में ऐलान कर दिया कि “अब बस स्टेंड पुरानी इटारसी में ही रहेगा,बसें वहीं से चलेंगी,कोई अल्टरनेटिव नहीं है!”विधायक के इस दृढ़ और तीखे तेवर के आगे बस ऑपरेटरों की बोलती बंद हो गई,कुछ चुनिंदा व्यापारियों ने फूल मालाओं के साथ विधायक का आभार जताया और.. बस!यहीं से कांग्रेस जिला मुख्यालय से लेकर पूरे संगठन में जैसे सांप सूंघ गया।याद कीजिए,पिछले साल जब बस स्टैंड शिफ्ट करने की सुगबुगाहट हुई थी,तब इसी कांग्रेस संगठन ने तगड़ा हल्ला बोला था।तब शहर के बीचों-बीच बस स्टैंड पर बसों के ‘दो मिनट के हॉल्ट’ की बात मनवा ली गई थी।लेकिन इस बार? पूरा परिदृश्य बदल चुका है,नेताजी लोग खामोश हैं और कांग्रेस का बिखरा हुआ कुनबा चौराहे पर बेनकाब होकर खड़ा है। जो बड़े नारों के साथ सड़कों पर उतरते थे वो अभी फिलहाल अदृश्य हैं,और एकला चलो वाली थ्योरी पर काम चल रहा है।हालांकि,बिना सुरक्षा व्यवस्था के जनता को भगवान भरोसे छोड़ देना भी अपने आप में एक बड़ा सवालिया निशान है।
राष्ट्रीय प्रवक्ता गुफरान अंसारी बोले,त्योहारों पर जनता की कमर तोड़ने का षड्यंत्र।
इस पूरे ड्रामे पर युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुफरान अंसारी ने सरकार पर करारा कटाक्ष करते हुए चुटकी ली। उन्होंने कहा,हम भी यातायात को सुलभ बनाना चाहते हैं, लेकिन क्या प्रशासन को इटारसी का माल गोदाम नजर नहीं आता,जिसकी वजह से पूरे शहर में प्रदूषण और भयंकर ट्रैफिक जाम लगता है? यही मुद्दा राज्यसभा सांसद माया नारोलिया ने संसद में भी उठाया था, जिसका अभी तक कुछ नहीं हुआ है।तब प्रशासन की आंखें क्यों बंद हो जाती हैं?ठीक त्योहारों से पहले आम जनता को परेशान करने और व्यापारियों की कमर तोड़ने के लिए यह तानाशाही भरा फैसला लिया गया है।शहर की प्रगति के लिए हम भी संकल्पित हैं,लेकिन जनता को कुचलकर नहीं,उन्हें साथ लेकर। हम तो बैरिकेडिंग से ही परेशान हैं जैसे दिल्ली में बैरिकेडिंग है,वैसे ही अब इटारसी बस स्टेंड में भी बैरिकेड्स लगा दिए है,
गुफरान अंसारी,राष्ट्रीय प्रवक्ता युवा कांग्रेस।
गज्जू तिवारी ने उठाई आवाज,अब अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
कांग्रेस सेवादल यंग ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष गजानन तिवारी “गज्जू” ने अकेले ही मोर्चा संभाल लिया है। शनिवार को गज्जू तिवारी ने सीधे इटारसी की सड़कों पर उतरकर दुकानदारों, व्यापारियों और आम नागरिकों से बस स्टैंड वापस लाने के लिए समर्थन मांगा।इतना ही नहीं,कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वकील रमेश के.साहू से लंबी चर्चा के बाद उन्होंने इस मामले को सीधे कोर्ट (न्यायालय) में घसीटने की रणनीति बनाई,यानी कानूनी लड़ाई का बिगुल बज चुका है।
दशहरे के बाद फूंकेंगे आंदोलन का बिगुल।
जब इस बाबत कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिवाकांत “गुड्डन” पांडे से बात की गई,तो उन्होंने अपनी सफाई में कहा,हम दशहरे के बाद व्यापारियों के साथ बैठकर लंबी चर्चा करेंगे और एक जोरदार आंदोलन की शुरुआत करेंगे।हम जनता और व्यापारियों से आग्रह करेंगे कि वे हमारा साथ दें,जैसे पिछले साल सबका साथ मिला था।यह निर्णय सरासर जनविरोधी है। नर्मदापुरम में भी तो बस स्टैंड बीच शहर में है,वहां तो कोई परेशानी नहीं होती,फिर इटारसी में ही यातायात की समस्या कहां से दिख रही है,
शिवाकांत”गुड्डन”पांडे, ज़िला अध्यक्ष कांग्रेस नर्मदापुरम।
अब आगे क्या ?
एक तरफ विधायक और नपा अध्यक्ष के इस कदम को उनका मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है,तो दूसरी तरफ जनता और व्यापारी बिना पर्याप्त सुविधाओं के पिस रहे हैं।कांग्रेस के भीतर की यह ‘चुप्पी’ क्या किसी बड़े तूफान से पहले की शांति है,या फिर संगठन की हार का मुकम्मल दस्तावेज।यह तो आने वाला दशहरा और जनता का मूड ही तय करेगा,फिलहाल तो कांग्रेस नेता एकलाचलो वाली थीम पर चलते नज़र आ रहे हैं।


