ताज ख़ान
नर्मदापुरम//
नर्मदापुरम संभागीय मुख्यालय जिसे जिला मुख्यालय भी कहा जाता है,वो इस समय टॉप 3 इंजीनियरों से सुसज्जित दिखाई पड़ रहा है,जो बेशक जिले के लिए बड़ा महत्व रखता है।बात कर रहे हैं संभाग आयुक्त श्रीकांत बनोठ,नर्मदापुरम पुलिस कप्तान साईं कृष्णा एस.थोटा,और जिले की कमान संभालने वाले नवागत जिला कलेक्टर आशीष वशिष्ठ की,तीनों ही आला अधिकारी इंजीनियरिंग के स्टूडेंट हैं।
महारथीयों के हांथ में ज़िला।
कमिश्नर श्रीकांत बनोठ आईआईटी मद्रास से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बी.टेक की डिग्री लिए हुए हैं,तो नवागत कलेक्टर आशीष वशिष्ठ आईआईटी रुड़की से सिविल इंजीनियरिंग बी.टेक किए हुए हैं।वहीं पुलिस कप्तान साईं कृष्णा एस थोटा एक कदम आगे आईपीएस अधिकारी और आईआईटी बॉम्बे से एम. टेक (m.tech) किए हुए हैं।हालांकि देखा जाए तो पुलिस कप्तान की नर्मदापुरम जिले में अहमद के बाद मानो पुलिसिंग अलग ही अंदाज में चल रही है।जहां पूरे सिस्टम को हाईटेक और डिजिटल कर दिया गया है,जिसका फायदा ज़िले को बड़े मामलों को सुलझाने और हल करने में मिल भी रहा है,जिले में इस वक्त डिजिटल पुलिसिंग हो रही है,जो एक सटीक रणनीति का हिस्सा है।वहीं नर्मदापुरम संभाग आयुक्त की बात करें तो अभी कोई खास उपलब्धि उनकी काबलियत के मुताबिक जिले में नजर नहीं आई हैं।अब नज़रें उम्मीद के साथ नवागत कलेक्टर की तरफ देख रही हैं,उनके आने के बाद से ही वह लगातार सुर्खियों में हैं।जिनके सामने अपार चुनौतियां हैं,जिसका सामना करके उन्हें अपनी कुशलता और दक्षता दिखाना पड़ेगा।
चुनौतियां और कुशलता।
नवागत कलेक्टर के सामने सबसे बड़ी चुनौती आने वाले समय में कृषि सिंचाई,और पेयजल व्यवस्था संभालना उनके हुनर की पहचान कराएगा। क्योंकि इस वर्ष कम वर्षा हुई है,और फिसड्डी नगर पालिका परिषदों ने पूरे जिले में कहीं भी जल गंगा संवर्धन अभियान जैसी केंद्र और राज्य सरकार की अति महत्वपूर्ण योजना को जिस तरीके से कचरे के डिब्बे में फेंका है वह आगामी गर्मी में पानी के लिए त्राहिमाम करते नागरिक ही बताएंगे।
जल गंगा संवर्धन अभियान।
जल गंगा संवर्धन अभियान जिसको किसी भी सरकारी तंत्र ने जरूरी नहीं समझा था,जिसके लिए सरकार ने जिला पंचायत को नोडल एजेंसी नियुक्त किया था,जिस पर सिर्फ दिखावा कर फोटो खिंचवाई गई और सुर्खियां बटोरी गई हैं।आने वाले समय में आम जनता के लिए उग्र होने का कारण बनेगा जब वाटर लेवल लगातार उतरेगा और पेयजल आपूर्ति बाधित होगी।जबकि इसी नर्मदापुरम ज़िले में एक ट्राइबल क्षेत्र केसला ब्लॉक भी है जहां 80% लोगों की आजीविका कृषि पर निर्भर है,जहांका भू जल स्तर हमेशा कम रहता है वहां क्या स्थिति होगी ये गंभीर विषय है।
महकमे के अधिकारी की चिंता।
एक सरकारी अफसर ने नाम ना बताने की शर्त पर बताया कि इस वर्ष अमूमन फरवरी माह से ही पानी की किल्लत शुरू हो जाएगी,कृषि में सिंचाई के लिए तो थोड़ा बहुत तवा डेम से आपूर्ति चलेगी, लेकिन गर्मियों में आने वाली फसलों को भारी नुकसान झेलना पड़ेगा।पानी की किल्लत सरकार की नींदें उड़ा देगी।अगर ज़िला पंचायत और नगर पालिकाएं अपना काम बखूबी करके शहर में स्थित प्राकृतिक स्रोत जैसे कुएं,बावड़ी, तालाब,दुरुस्त करवा कर रिचार्ज करने की व्यवस्था कर देती,और वाटर हार्वेस्टिंग को प्राथमिकता देते हुए थोड़ी मेहनत कर लेतीं तो आम जनता उनके वजह से परेशानी नहीं झेलती।
अब देखना होगा कि पूर्व कलेक्टर सोमेश मिश्रा की तरह वर्तमान कलेक्टर भी ऐसे गंभीर मुद्दे पर वेट एंड वॉच वाली मुद्रा में रहते हैं या इंजीनियरिंग की डिग्री को सार्थक करते हुए जनता के हितों और सहूलियतों के लिए कार्य कर पाते हैं।
सूखाग्रस्त।
हालांकि विपक्षी दल कांग्रेस भी इस मुद्दे को भुनाने के मूड में लग गई है,किसान कांग्रेस जिला अध्यक्ष विजय”बाबू” चौधरी ने अभी से नर्मदापुरम ज़िले को सूखाग्रस्त घोषित करने के लिए बिगुल फूंक दिया है,जो आगामी समय में सरकारी तंत्र की नींद उड़ा कर रख देगा।और सत्ता दल के नेताओं को इसकी कोई चिंता दिखती नहीं है,या पानी टैंकरों के नाम पर राजनीति करने की तैयारी में हैं।

