नर्मदापुरम केंद्रीय जेल में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित,आर्थिक तंगी के कारण न्याय से कोई नहीं रहेगा वंचित ।

ताज ख़ान
नर्मदापुरम//
न्याय सबके लिए के संकल्प को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से शनिवार को केंद्रीय जेल नर्मदापुरम में एक भव्य विधिक जागरूकता एवं साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के दिशा-निर्देशों और प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य जेल में बंद कैदियों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति सजग करना और उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ना रहा।

न्यायिक जगत की दिग्गज हस्तियों की रही उपस्थिति।

इस महत्वपूर्ण शिविर में न्याय विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने शिरकत की। कार्यक्रम में मुख्य रूप से अरविंद श्रीवास्तव(जिला न्यायाधीश/अतिरिक्त सचिव,म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण,जबलपुर,
सुश्री के.शिवानी न्यायाधीश/सचिव,जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नर्मदापुरम,अभय सिंह जिला विधिक सहायता अधिकारी,नर्मदापुरम,संतोष सोलंकी जेल अधीक्षक, केंद्रीय जेल नर्मदापुरम,सहित जेल प्रशासन का समस्त स्टाफ मौजूद रहा।

आर्थिक रूप से कमजोर बंदियों को मिलेगा निशुल्क विधिक कवच’।

शिविर के दौरान न्यायाधीशों ने बंदियों को संबोधित करते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी अधिकार की जानकारी दी।उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई भी बंदी अपने मामले की पैरवी के लिए स्वयं के खर्च पर निजी वकील (अधिवक्ता) रखने में सक्षम नहीं है,तो उसे घबराने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है।विधिक सहायता योजना के माध्यम से ऐसे बंदियों को शासन की ओर से पूरी तरह’निःशुल्क अधिवक्ता’उपलब्ध कराए जाते हैं,जो पूरी निष्ठा के साथ कोर्ट में उनके केस की पैरवी करते हैं।न्यायिक टीम ने बंदियों से वन-टू-वन चर्चा कर उनके प्रकरणों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा भी की।

जेल प्रशासन को निर्देश पाकशाला का निरीक्षण और नियमित स्वास्थ्य जांच।

सत्र के दौरान अधिकारियों ने जेल परिसर की पाकशाला (रसोईघर) का सघन निरीक्षण किया और भोजन की गुणवत्ता जांची। इसके साथ ही न्यायाधीशों ने जेल अधीक्षक संतोष सोलंकी को निर्देश दिए कि
1.जेल में बंद सभी कैदियों का समय-समय पर अनिवार्य रूप से स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए।
2.जो बंदी गरीबी के कारण वकील नहीं कर पा रहे हैं, उनके आवेदन तुरंत तैयार करवाकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण,जिला न्यायालय नर्मदापुरम को भेजे जाएं,ताकि उन्हें तुरंत कानूनी मदद मिल सके।

जेल से रिहाई के बाद अपराधी’नहीं,सशक्त नागरिक’बनेंगे बंदी।

शिविर की सबसे खास बात यह रही कि इसमें दंडित बंदियों को अधिकारियों ने जेल से रिहा होने के बाद समाज की मुख्य धारा में सम्मानजनक तरीके से वापस लाने पर लंबी चर्चा की।उन्हें भविष्य में किसी कठिनाई का सामना न करना पड़े,इसके लिए जेल के भीतर ही रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यक्रम पर बात की,ताकि रिहा होने के बाद वे खुद का रोजगार शुरू कर एक बेहतर और स्वाभिमानी जीवन जी सकें।

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