ताज ख़ान
नर्मदापुरम//
इटारसी इंडस्ट्रियल एरिया में नयन इंडस्ट्री के नाम से आरा मशीन संचालित है,जिसमें विगत दिनों वन विभाग ने रेड भी कि थी जहां बड़ी मात्रा में लकड़ी का स्टॉक पाया गया था।खेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया स्थित आरा मशीन में वन विभाग द्वारा कार्रवाई की गई थी जिसमें बड़ी संख्या में वन विभाग के अधिकारी अपने दल बल के साथ पहुंचे थे,जहां उन्हें भारी मात्रा में सटकटा की गीली लकड़ी पाई गई थी।जिसका पूरा नापतोल किया गया,यह पूरी कार्यवाही प्रियांशु जैन ट्रेनी आईएफएस अधिकारी के नेतृत्व में अंजाम दी गई थी।लेकिन यहीं से मामले में ट्विस्ट पैदा होता है, विभाग के एक विश्वसनीय सूत्र द्वारा बताया गया कि उक्त स्टॉक जो वहां मिला उसकी मात्रा अत्यधिक पाई गई थी, जिसे वन अधिकारियों द्वारा कम दर्शाया गया है,जो बड़े झोल झाल और लेनदेन की तरफ इशारा करता है। ये वन विभाग के अधिकारियों की करवाई को शक के घेरे में खड़ा करता है? क्या इसके पीछे कुछ और भी चल रहा है या कुछ डील है,इसपर नज़र बनाई हुई है।
ऐसा बताया गया कि उक्त इंडस्ट्री में जरूरत से ज्यादा स्टॉक अभी भी मौजूद है,लेकिन यहां वन विभाग ने अपनी आंखों को बंद कर लिया है,सूत्र ने बताया कि उक्त नयन इंडस्ट्रीज एवं इन्हीं के दूसरे संस्थान गालर इंडस्ट्री जो के खेड़ा में स्थित है।सूत्रों द्वारा बताया कि इंडस्ट्री में जो स्टॉक के कागज उपलब्ध हैं उसमें और मौजूदा स्टॉक में लगभग 90% का हेर फेर किया गया है ।मौजूदा स्टॉक 90% है और कागज सिर्फ 10% के ही उपलब्ध हैं ,जो वन विभाग एवं शासन को बड़े राजस्व की हानि नयन इंडस्ट्री द्वारा पहुंचाई जा रही है,और इन सब पर वन विभाग के अधिकारी आंखें बंद किए हुए हैं।ज्ञात हुआ है कि इन्हीं के संस्थान की एक और यूनिट जिला सीहोर बुधनी के माना इंडस्ट्रियल एरिया में भी स्थित है।जहां भारी मात्रा में अवैध स्टॉक रखा गया है,इसकी सूचना राज्य स्तरीय उड़न दस्ता एवं पीसीसीएफ संरक्षण भोपाल एवं वन बल और वन सचिव को भी पहुंचाने की तैयारी है।सूत्र द्वारा बताया गया की बुधनी स्थित इंडस्ट्री में लगभग 25 से 30 हजार घन फुट यानी 25 से 30 ट्राला भरकर लगभग हजार घन मीटर अवैध स्टॉक मौजूद है,जो नयन इंडस्ट्रीज में स्थित चार आरा मशीन एवं गालर इंडस्ट्री में दो से तीन आरा मशीनो द्वारा लगभग तीन वर्षों से चीरा हुआ स्टॉक है,जिसकी अगर जांच होती है तो यह मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा अवैध वन उपज का भंडारण कहलाएगा ,जिससे सरकार को भारी राजस्व की प्राप्ति भी हो सकती है,जो विगत कई वर्षों से सरकार की आंखों में धूल झोंक के धड़ल्ले से चला रहा है।

