
अजय मालवीय ट्रेडर्स के दो गोदामों की जांच, बड़ी मात्रा में डीएपी-यूरिया मिला; भंडारण के दस्तावेज नहीं मिलने पर उठे सवाल
कलेक्टर के निर्देश पर उर्वरक जांच दल ने की कार्रवाई, पंचनामा बनाकर जांच में लिया मामला; खाद के लिए भटक रहे किसानों के बीच भंडारण व्यवस्था पर सवाल

शोभापुर/सोहागपुर। क्षेत्र में किसानों को डीएपी और यूरिया खाद की उपलब्धता को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसान एक-एक बोरी खाद के लिए पिपरिया, सेमरी हरचंद और सोहागपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों में दुकानों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। वहीं, दूसरी ओर अजय मालवीय ट्रेडर्स के दो गोदामों में बड़ी मात्रा में डीएपी और यूरिया पाए जाने के बाद उर्वरक भंडारण व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। कलेक्टर के निर्देश पर अधिकारियों की टीम ने दोनों गोदामों की जांच की। जांच के दौरान भंडारण से संबंधित सूची और दस्तावेज तत्काल उपलब्ध नहीं कराए जाने की बात सामने आई है। अधिकारियों ने पंचनामा तैयार कर मामले को जांच में लिया है।
शासकीय संस्थाओं के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर की नजर पड़ी खाद के भंडार पर

जानकारी के अनुसार, कलेक्टर द्वारा शोभापुर क्षेत्र में विभिन्न शासकीय संस्थाओं का निरीक्षण किया जा रहा था। इसी दौरान गोदाम में बड़ी मात्रा में खाद रखे होने पर उनकी नजर पड़ी। इसके बाद कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि गोदाम में रखे उर्वरक की जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि खाद का भंडारण नियमानुसार किया गया है या नहीं। निर्देश मिलने के बाद कृषि विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की प्रक्रिया शुरू की।
दो गोदामों में डीएपी और यूरिया की जांच

कलेक्टर के निर्देश के बाद उर्वरक जांच अधिकारी, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, नायब तहसीलदार राम सिपाही मरावी और पटवारी की उपस्थिति में अजय मालवीय ट्रेडर्स के दो गोदामों की जांच की गई। जांच के दौरान दोनों गोदामों में बड़ी मात्रा में डीएपी और यूरिया खाद पाया गया। अधिकारियों ने उपलब्ध खाद का निरीक्षण करते हुए पंचनामा तैयार किया और मामले को आगे की जांच के लिए लिया।
जांच का प्रमुख बिंदु यह है कि गोदामों में रखे उर्वरक की मात्रा, उपलब्ध स्टॉक रिकॉर्ड, बिक्री संबंधी विवरण और भंडारण से जुड़े दस्तावेजों का आपस में मिलान किया जाए। इससे स्पष्ट हो सकेगा कि गोदाम में उपलब्ध खाद का भंडारण निर्धारित नियमों के अनुसार किया गया था या नहीं।
भंडारण सूची उपलब्ध नहीं करा पाने से बढ़े सवाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जांच के दौरान अजय मालवीय तत्काल भंडारण की सूची अधिकारियों को उपलब्ध नहीं करा सके। वहीं, उनके प्रतिनिधि की ओर से यह कहा जाता रहा कि किसानों ने खाद के लिए पर्चियां कटवा रखी हैं, लेकिन वे अभी तक खाद लेने नहीं पहुंचे हैं।
प्रतिनिधि का यह तर्क जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू हो सकता है। हालांकि, इस दावे की पुष्टि के लिए संबंधित पर्चियों, किसानों के नाम, बिक्री अथवा अग्रिम बुकिंग के रिकॉर्ड और गोदाम में उपलब्ध वास्तविक स्टॉक का मिलान आवश्यक होगा। यदि खाद किसानों के नाम पर आरक्षित किया गया था, तो संबंधित दस्तावेजों से इसकी पुष्टि की जा सकती है।
ऐसे में सवाल उठता है कि यदि भंडारण और किसानों की बुकिंग से संबंधित सभी रिकॉर्ड उपलब्ध थे, तो जांच के दौरान उन्हें तत्काल प्रस्तुत क्यों नहीं किया जा सका? क्या दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया है? यदि समय दिया गया है, तो क्या निर्धारित अवधि में संपूर्ण रिकॉर्ड प्रस्तुत किया जाएगा? इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
खाद के लिए भटक रहे किसान, ऐसे में भंडारण व्यवस्था पर सवाल

वर्तमान समय में किसानों के लिए डीएपी और यूरिया की उपलब्धता कृषि कार्यों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। क्षेत्र के किसान खाद प्राप्त करने के लिए विभिन्न दुकानों और केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं। ऐसे में किसी निजी प्रतिष्ठान के गोदाम में बड़ी मात्रा में खाद पाए जाने और उसके भंडारण संबंधी दस्तावेज तत्काल उपलब्ध नहीं होने की जानकारी सामने आने से खाद वितरण व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि, केवल गोदाम में बड़ी मात्रा में खाद मिलने से अवैध भंडारण या कालाबाजारी साबित नहीं होती। इसके लिए स्टॉक रजिस्टर, खरीद बिल, बिक्री रिकॉर्ड, लाइसेंस, निर्धारित स्टॉक सीमा तथा अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच करना जरूरी है। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रशासन से निष्पक्ष और सख्त जांच की अपेक्षा
मामले में प्रशासन के सामने सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि गोदाम में उपलब्ध डीएपी और यूरिया का पूरा हिसाब सामने आए। अधिकारियों को वास्तविक स्टॉक और रिकॉर्ड का मिलान करने के साथ यह भी देखना चाहिए कि खाद की खरीद कहां से की गई, उसकी बिक्री किसे की गई और किसानों के नाम पर पर्चियां काटे जाने के दावे की वास्तविकता क्या है।
यदि भंडारण वैध है और सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। वहीं, यदि रिकॉर्ड में अनियमितता, निर्धारित नियमों का उल्लंघन, जमाखोरी अथवा खाद की कालाबाजारी के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
फिलहाल अजय मालवीय ट्रेडर्स के दोनों गोदामों में मिले डीएपी और यूरिया के स्टॉक तथा भंडारण से संबंधित दस्तावेजों की जांच इस मामले का निर्णायक पहलू है। किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि उन्हें एक-एक बोरी के लिए परेशान न होना पड़े।
अब देखना होगा कि जांच दल के समक्ष संबंधित प्रतिष्ठान द्वारा कौन-कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए जाते हैं और स्टॉक का मिलान होने के बाद जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट और सक्षम अधिकारियों की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।
