सितारगंज : भैंस पालन से परमजीत ने संवारी परिवार की आर्थिक स्थिति ,स्वयं सहायता समूह से जुड़कर शुरू किया पशुपालन, दो साल में कमाए 1.32 लाख रुपये

रिपोर्ट। ललित जोशी।
सितारगंज। मेहनत, सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो ग्रामीण महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने के साथ-साथ अपनी अलग पहचान भी बना सकती हैं। शक्तिफार्म क्षेत्र के जगतारपुर बसगर गांव की परमजीत कौर ने इसे अपने प्रयासों से साबित किया है। परमजीत कौर, पत्नी बलविंदर सिंह, खुशी स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। यह समूह गुरुनानक ग्राम संगठन और बढ़ते कदम समूह के साथ मिलकर कार्य कर रहा है। उन्होंने भैंस पालन को आजीविका का साधन बनाकर परिवार की आमदनी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
उद्यम शुरू करने से पहले परमजीत कौर गृहिणी थीं और परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए मजदूरी पर भी निर्भर रहना पड़ता था। सीमित आय के कारण परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण था। नियमित और स्थायी आमदनी का कोई मजबूत साधन नहीं था। इसी दौरान ग्रामोत्थान परियोजना के सहयोग से उन्हें स्वरोजगार का अवसर मिला। उन्होंने भैंस पालन को अपना व्यवसाय बनाकर मेहनत और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग आय के स्थायी साधन के रूप में करना शुरू किया।
भैंस पालन शुरू करने के लिए कुल एक लाख रुपये की लागत आई। इसमें परमजीत कौर ने अपनी ओर से 20 हजार रुपये लगाए, जबकि 30 हजार रुपये की परियोजना सहायता मिली और 50 हजार रुपये बैंक से ऋण लिया गया। आर्थिक सहयोग मिलने के बाद उन्होंने पशुपालन को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया।
पिछले 24 महीनों में भैंस पालन से उन्हें कुल एक लाख 32 हजार 500 रुपये की आय हुई। इस दौरान 20 हजार 400 रुपये खर्च हुए। खर्च निकालने के बाद उन्हें एक लाख 12 हजार 100 रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ है। वर्तमान में इस व्यवसाय से उनकी औसत मासिक शुद्ध आय करीब 4500 से 5500 रुपये तक पहुंच गई है।
आय से बैंक ऋण की राशि भी चुकाई
परमजीत कौर ने अपने व्यवसाय से होने वाली आय का उपयोग बैंक ऋण चुकाने में भी किया। अब तक वह बैंक ऋण की 45 हजार 500 रुपये की राशि वापस कर चुकी हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ ही आत्मविश्वास भी बढ़ा है। आज वह परिवार की आय में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं और अपने कार्य के लिए खुद की पहचान बना चुकी हैं।
परमजीत कौर का कहना है कि भैंस पालन शुरू करने के बाद उनकी आजीविका में सुधार हुआ है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति भी पहले की अपेक्षा बेहतर हुई है। 25 सितंबर 2026 तक किए गए सर्वेक्षण में उनकी यह उपलब्धि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण और स्वरोजगार की प्रेरक मिसाल के रूप में सामने आई है।
परमजीत कौर की सफलता यह संदेश देती है कि ग्रामीण महिलाओं को यदि उचित मार्गदर्शन, आर्थिक सहयोग और स्वरोजगार का अवसर मिले तो वे न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि परिवार की आर्थिक मजबूती में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। ग्रामोत्थान परियोजना का सहयोग उनके लिए केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, सम्मान और बेहतर आजीविका की दिशा में आगे बढ़ने का माध्यम भी बना है।
