ताज ख़ान
इटारसी//
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व सेक्रेटरी ऑर्गेनाइजेशन एवं अधिवक्ता रमेश के. साहू ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)और निर्वाचन आयोग की आंतरिक साजिशों को लेकर इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट से तत्काल स्वयं संज्ञान लेने की जोरदार मांग की है।
आयोग के निर्णयों पर लिखित आपत्ति दर्ज।
साहू ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम-से-कम 14 बार आयोग के निर्णयों पर लिखित आपत्ति दर्ज की। ये आपत्तियां सिर्फ कागजी नहीं, बल्कि लोकतंत्र पर सीधा हमला हैं–दोनों आयुक्तों को अंधेरे में रखकर फैसले लेना, फॉर्म-6 में मनमाना बदलाव,लाखों मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से हटाना-जोड़ना और मतदाता डाटाबेस का केंद्रीकरण।यह सामान्य मतभेद नहीं,करोड़ों नागरिकों के संवैधानिक मताधिकार की हत्या है।
उन्होंने सख्त लहजे में कहा।
“भारत के नागरिक का वोट कोई भीख नहीं, संविधान द्वारा प्रदत्त पवित्र अधिकार है।किसी भी पात्र मतदाता का नाम अपारदर्शी,मनमानी और संदिग्ध प्रक्रिया से सूची से हटाना मताधिकार पर सीधा प्रहार है।मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में लिए गए इन विवादित और विवादास्पद निर्णयों की सर्वोच्च न्यायालय की सीधी निगरानी में स्वतंत्र, पारदर्शी और समयबद्ध जांच तुरंत होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट स्वयं संज्ञान ले तो बेहतर।”
सत्ताधारी दल को फायदा पहुंचाने का अपराध।
श्री साहू ने मांग की है के दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा दर्ज सभी आपत्तियां,फाइल नोटिंग और उन पर हुई/न हुई कार्रवाई तुरंत सार्वजनिक की जाए। अगर जांच में ज्ञानेश कुमार या किसी अधिकारी द्वारा जानबूझकर मतदाता सूची में हेराफेरी,अधिकारों का दुरुपयोग या सत्ताधारी दल को फायदा पहुंचाने का अपराध साबित होता है, तो उन्हें पद से तत्काल हटाया जाए और उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।उन्होंने दिल्ली,बिहार,महाराष्ट्र,पश्चिम बंगाल, हरियाणा,मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित उन सभी राज्यों में मतदाता सूचियों का स्वतंत्र और निष्पक्ष ऑडिट कराने की मांग की, जहां नाम जोड़ने-हटाने को लेकर गंभीर शिकायतें आई हैं। जहां अनियमितताओं के कारण चुनाव परिणाम प्रभावित होने के प्रमाण मिलें,वहां न्यायिक प्रक्रिया के तहत पुनर्मतदान या पुनःचुनाव कराया जाए।
साहू ने स्पष्ट और आक्रामक आरोप लगाया ।
सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को कठपुतली बनाकर अधिकारों का मनमाना दुरुपयोग कराने की योजना रची है।यही वजह है कि उन्हें सुरक्षा कवच पहनाया गया है।यह लोकतंत्र की हत्या का खुला प्रयास है।सुप्रीम कोर्ट अगर अभी नहीं जागा,तो आने वाले चुनावों में जनता का भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा।

