नैनीताल उत्तराखंड : इंटरनेट के इस दौर में सूचनाओं की उपलब्धता तो बढ़ी है, लेकिन पुस्तकों का महत्व आज भी बरकरार है। कुलपति प्रोफेसर सतपाल बिष्ट।

संवाददाता। ललित जोशी नैनीताल।
नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल डीएसबी परिसर में मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते प्रभाव के बीच बच्चों में पुस्तकों के प्रति घटती रुचि को देखते हुए पुस्तक दान महोत्सव का आयोजन किया गया। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी के सौजन्य से आयोजित महोत्सव में बच्चों को पुस्तकों के महत्व से अवगत कराने के साथ ही उनमें नियमित अध्ययन की आदत विकसित करने का संदेश दिया गया। इस दौरान प्रतिष्ठित लेखकों की पुस्तकें वितरित कर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण साहित्य पढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सतपाल सिंह बिष्ट ने कहा कि इंटरनेट के इस दौर में सूचनाओं की उपलब्धता तो बढ़ी है, लेकिन पुस्तकों का महत्व आज भी बरकरार है।
इंटरनेट पर उपलब्ध प्रत्येक जानकारी की प्रमाणिकता सुनिश्चित नहीं होती, जबकि पुस्तकों को लेखन, संपादन और प्रूफ रीडिंग जैसी प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद प्रकाशित किया जाता है। ऐसे में पुस्तकों के माध्यम से प्राप्त ज्ञान अधिक व्यवस्थित, विश्वसनीय और संदर्भ आधारित होता है।
उन्होंने कहा कि मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के कारण बच्चों में पुस्तकें पढ़ने की प्रवृत्ति कम होना चिंता का विषय है। नई पीढ़ी को कम उम्र से ही पुस्तकों से जोड़ना और उनमें पढ़ने की आदत विकसित करना जरूरी है। पुस्तक दान महोत्सव इसी उद्देश्य से की गई एक सार्थक पहल है, जिसके माध्यम से बच्चों तक अच्छी पुस्तकें पहुंचाकर अध्ययन के प्रति उनकी रुचि बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रोफेसर बिष्ट ने कहा कि सिविल सेवा सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में प्रमाणिक पुस्तकों और मूल स्रोतों का विशेष महत्व है। विद्यार्थियों को अध्ययन के दौरान पुस्तक के लेखक, स्रोत और संदर्भ पर भी ध्यान देना चाहिए। केवल इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री के भरोसे रहने के बजाय मानक पुस्तकों का नियमित अध्ययन करना आवश्यक है। अपने संबोधन में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर नवीन चंद्र लोहानी ने कहा कि इंटरनेट और पुस्तकें एक-दूसरे के विकल्प नहीं, बल्कि ज्ञान प्राप्ति के पूरक माध्यम हैं। इंटरनेट जहां त्वरित जानकारी उपलब्ध कराता है, वहीं पुस्तकों के अध्ययन से विषय की गहरी और क्रमबद्ध समझ विकसित होती है। विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन के साथ अपने नोट्स तैयार करने की आदत भी डालनी चाहिए। उन्होंने भविष्य में भी पुस्तक मेलों और पुस्तक दान जैसे आयोजनों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। कार्यक्रम में निदेशक प्रॉफ संजय पंत ने सभी का स्वागत किया तथा कुलसचिव प रितेश साह ने सभी का धन्यवाद किया । कार्यक्रम का संचालन निर्देशक विजिटिंग प्रोफेसर डाक्टर ललित तिवारी ने किया । कार्यक्रम में भारतीय परंपरा अनुरूप पुस्तक दान हेतु कुलपति प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी को कुमाऊं विश्वविधालय की तरफ से प्रशस्ति पत्र भेट किया गया । कुलपति प्रोफेसर बिष्ट तथा प्रोफेसर लोहनी को शॉल उड़ाकर तथा गणेश जी भेट कर सम्मानित किया गया । राष्ट्रगीत ,राष्ट्रगान एवं कुलगीत से प्रारंभ हुए इस महोत्सव में ठाकुर देव सिंह बिष्ट की मूर्ति पर माल्यार्पण तथा मां सरस्वती कीमूर्ति पर दीप प्रज्वलन तथा पुष्प अर्पित किये गया । शोध निदेशक डॉक्टर मनोज कुमार आर्य तथा चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर हरीश बिष्ट ने कुलपति प्रॉफ लोहनी तथा कुलसचिव को शोध कार्य मोथ एटलस तथा गोल्डन बर्डविंग का चित्र भेट किया । छात्र महासंघ अध्यक्ष यतेंद्र पांडे ने दोनों कुलपति को पुष्प गुच्छ भेट किया । कार्य क्रम में बड़ी संख्या में प्राध्यापक ,कर्मचारी ,शोधार्थी ,विद्यार्थी उपस्थित रहे । महोत्सव में 3000 पुस्तके निशुल्क वितरित हुई । महोत्सव में प्रोफेसर ज्योति जोशी ,प्रोफेसर महेंद्र राणा ,प्रोफेसर दीपक पालीवाल ,प्रोफेसर अर्चना श्रीवास्तव , डॉक्टर सुषमा टम्टा ,डॉक्टर नीलू ,डॉक्टर मोहित रौतेला ,डॉक्टर दीपक मेलकानी , डॉक्टर अनीता पांडे ,प्रोफेसर आशीष तिवारी ,डॉक्टर प्रभा पंत ,डॉक्टर हेम जोशी ,डॉक्टर अशोक उप्रेती , प्रोफेसर लज्जा भट्ट , प्रोफेसर रीना सिंह , प्रोफेसर रुवाली,डॉक्टर मुकेश सामंत , डॉक्टर मंडोली , डॉक्टर सीता देवली , डॉक्टर गगन होती ,डॉक्टर अशोक कुमार ,डॉक्टर रवि जोशी ,डॉक्टर दीपा ,डॉक्टर प्रदीप गोस्वामी , नंदा बल्लभ पालीवाल ,देवेंद्र बिष्ट ,रितेश ,कुंदन , अजय ,नवीन ,लता नितवाल आदि उपस्थित रहे ।
