ताज ख़ान
नर्मदापुरम//
न्याय के लिए दर-दर भटक रहे वन विभाग के चौकीदारों के प्रति वन विभाग की लीपा पोती साफ़ देखी जा सकती है,क्योंकि पीड़ित ग़रीब आदिवासी हैं तो फ़िर तो बात आई गई करदी जा रही है।वो भी उस क्षेत्र में जिसे आदिवासी बहुल क्षेत्र कहा जाता है।जहां इस वर्ग के लिए विशेष दर्जा दिया गया है,जिसे पैसा एक्ट के नाम से जाना जाता है। सरकार तो इस वर्ग के उत्थान के लिए अपनी तरफ़ से भरसक प्रयास कर रही है लेकिन अफ़सर शाही का नशा अधिकारियों के सर चढ़कर बोल रहा है।जिसमें वन विभाग के ऊपर तो मानो कोई लगाम ही नहीं है, जिसे चाहें जहां चाहें रगड़ दें।ऐसे ही इस महकमे के एक साहब एस.डी.ओ.अनिल विश्वकर्मा तो विभाग के पावर बैंक बने हुए हैं,जो जिसे चाहें अपनी ताक़त का शिकार बनाते हैं,
क्या है मामला।
वैसे तो कई मामले सामने आ रहे हैं,लेकिन अभी दो आदिवासी चौकीदारों का मामला तूल पकड़ते जा रहा है। हमारा गांव संगठन के प्रदेश संयोजक दुर्गेश धुर्वे ने महामहीम राष्ट्रपति के नाम लिखे शिकायती पत्र में बताया है कि अनिल विश्वकर्मा और इनके अधीनस्थ अधिकारि जिनमें (वन रक्षक) अजय यादव,विकास केथवास (वनरक्षक),राजेंद्र वर्मा(डिप्टी रेंजर),ज्ञान सिंह पवार(रेंजर बानापुरा),ने 30 मार्च 2026 को आदिवासी विकासखंड केसला के अंतर्गत आने वाले चिचवानी निवासी डोरीलाल लविस्कर,एवं ग्राम भोवदा निवासी रामचरण चौहान को लकड़ी चोरी की पूछताछ के लिए सिवनी मालवा रेंज लेजाकर उनको तीन दिनो तक बंधक बना कर टॉर्चर किया।इनके साथ ही एक दिन वन रक्षक महिपाल सिंह से भी पूँछतांछ कर उन्हें भी प्रताड़ित किया गया।जिसमें इन दोनों चौकीदारों को तो बिजली का करंट तक लगा डाला।जब कुछ हांथ नहीं लगा तो कोर्ट में पेश कर पहले कोरे कागज़ पर साइन करवाकर ज़मानत भी करवा दी।
हमारा गांव संगठन हुआ लाम बंद,महामहीम से की शिकायत।
अब ये मामला लगातार सुर्खियों में आ रहा है और इस ज़ुल्म के ख़िलाफ़ लगातार सामाजिक संगठन आगे आ रहे हैं।इस बर्बरता के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाते हुए हमारा गांव संगठन के प्रदेश संयोजक दुर्गेश धुर्वे ने देश के महामहिम राष्ट्रपति को ईमेल द्वारा विभाग के अधिकारी अनिल विश्वकर्मा के खिलाफ पत्राचार करते हुए अनिल विश्वकर्मा द्वारा प्रताड़ित करने और प्रशासन द्वारा कोई सहयोग नहीं किए जाने की शिकायत की है। श्री धुर्वे ने न सिर्फ राष्ट्रपति बल्कि नर्मदापुरम जिले सहित नर्मदापुरम संभागीय अधिकारियों को इन गरीब कर्मचारियों को न्याय दिलाने के लिए आग्रह किया है। उन्होंने बताया कि ये कोई नया मामला नहीं है इससे पहले भी विभाग के अधिकारियों ने एक आदिवासी को शेर का शिकार करने के झूठे आरोप लगते हुए मार पीट की थी जब कुछ हांथ नहीं लगा तो छोड़ दिया।
अधिकारियों को मिल रहा है संरक्षण।
विडंबना यह है कि इन अधिकारियों को लगातार प्रशासन द्वारा बचाया जा रहा है,इस मामले में दोनों ग़रीब चौकीदारों ने एफ.आई.आर के लिए पुलिस अधीक्षक तक से गुहार लगा चुके हैं,लेकिन गरीब आदिवासियों को कहीं न्याय नहीं मिल पा रहा है, इन अधिकारियों के विरुद्ध अभी तक एफ.आई.आर (FIR) तक नहीं की गई है।
यह अपने हक अधिकार और न्याय के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं,
वनमण्डलधिकारी के सामने हुए बयान दर्ज।
बुधवार को वन मंडल अधिकारी नर्मदापुरम (स)के सामने इन पीड़ितों के बयान भी दर्ज हुए हैं।लेकिन अभी तक उक्त अधिकारियों पर कोई दबाव नहीं दिखाई दे रहा है,जो विभाग द्वारा की जा रही दबंगई को प्रदर्शित करता है।
प्रदर्शन की चेतावनी।
श्री धुर्वे ने कहा है कि अगर इन गरीबों को न्याय नहीं मिलता है और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती है तो निश्चित ही पूरे प्रदेश में हमारा गांव संगठन विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरेंगे।

