सोहागपुर में रेत उत्खनन का खेल: एनजीटी के नियमों की अनदेखी, कार्रवाई तेज, पर सवाल बरकरार

सोहागपुर में रेत उत्खनन का खेल: एनजीटी के नियमों की अनदेखी, कार्रवाई तेज, पर सवाल बरकरार

सोहागपुर (जिला नर्मदापुरम)।
क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन का सिलसिला वर्षों से जारी है। आरोप है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के दिशा-निर्देशों को ताक पर रखकर लगातार उत्खनन किया जा रहा है। हालांकि हाल के महीनों में पुलिस और खनिज विभाग ने ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू की है, लेकिन जमीनी हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं।

वर्षों पुराना खेल, अब बढ़ी सक्रियता

स्थानीय लोगों के अनुसार पहले खनिज विभाग की कार्रवाई कभी-कभार ही होती थी। रेत चोर 800 से 1000 रुपये प्रति ट्रैक्टर या दूरी के अनुसार कीमत तय कर रेत बेचते थे। परंतु अब “रेत रायल्टी” के नाम पर अवैध वसूली शुरू होने के आरोप लग रहे हैं, जिसके चलते रेत की कीमत 2500 से 5000 रुपये तक पहुंच गई है।

इसका सीधा असर गरीब परिवारों पर पड़ा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को निर्माण कार्य के लिए सस्ती रेत मिलना मुश्किल हो गया है। कई परिवारों ने बताया कि एक ट्रैक्टर रेत की व्यवस्था करना भी अब चुनौती बन गया है।

रेवा-मुहरी खदान पर सवाल

प्रशासन द्वारा रेवा-मुहरी क्षेत्र को रेत उत्खनन के लिए आबंटित किया गया है, लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि संबंधित खदान में पर्याप्त रेत उपलब्ध ही नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब खदान में रेत का भंडार सीमित है, तो क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हो रहा उत्खनन आखिर किस स्रोत से हो रहा है?

राजस्व को भारी नुकसान

जिस पैमाने पर अवैध उत्खनन जारी है, उससे शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। यह वही राशि है, जिसका उपयोग क्षेत्र में सड़क, नाली, पेयजल और अन्य विकास कार्यों में किया जा सकता था।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पारदर्शी तरीके से खनन और रायल्टी वसूली हो, तो शासन को पर्याप्त आय हो सकती है और अवैध कारोबार पर अंकुश लगाया जा सकता है।

सड़क परिवहन विभाग की भूमिका पर प्रश्न

सोहागपुर क्षेत्र में अब तक 12–13 रेत से भरे ट्रैक्टरों पर कार्रवाई की जा चुकी है। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से अधिकांश ट्रैक्टरों पर नंबर प्लेट तक नहीं थी। जानकारी के अनुसार कार्रवाई मुख्यतः अवैध उत्खनन पर की गई है, लेकिन बिना नंबर प्लेट के वाहन चलना सीधे तौर पर मोटर वाहन नियमों का उल्लंघन है।

ऐसे में सवाल उठता है कि सड़क परिवहन विभाग इस मामले में अपनी जिम्मेदारी क्यों नहीं निभा रहा? यदि वाहनों की नियमित जांच हो और वैध दस्तावेज अनिवार्य किए जाएं, तो अवैध परिवहन पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

निष्कर्ष

रेत उत्खनन का यह मुद्दा केवल अवैध खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, राजस्व हानि, गरीबों के आवास निर्माण और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है। कार्रवाई तेज हुई है, परंतु जब तक विभागीय समन्वय, पारदर्शिता और कठोर निगरानी नहीं होगी, तब तक इस पर पूर्ण विराम लगना मुश्किल दिखाई देता है।

अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर विषय पर ठोस और स्थायी समाधान कब तक लागू करता है।

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