ताज ख़ान
नर्मदापुरम//
भारत–अमेरिका व्यापार समझौता: सिर्फ व्यापार नहीं,एक रणनीतिक कदम,भारत और अमेरिका के बीच उभरता व्यापार समझौता अब केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं,बल्कि एक व्यापक रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।जानकारों का मानना है कि यह कोई पूर्ण “फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA)” नहीं, बल्कि एक सीमित और लचीला ढांचा है,जिसका उद्देश्य सहयोग बढ़ाना है,साथ ही नीतिगत स्वतंत्रता बनाए रखना भी है।
पूर्ण मुक्त व्यापार समझौता नहीं।
विशेषज्ञों के अनुसार यह समझौता पारंपरिक FTA की तरह व्यापक नहीं है।इसे एक संतुलित और चरणबद्ध व्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है,जिसमें दोनों देश व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ अपने-अपने आर्थिक हितों की रक्षा कर सकें।अमेरिका की बदलती व्यापार नीतियों को ध्यान में रखते हुए भारत लचीलापन बनाए रखना चाहता है।
व्यापार से अधिक रणनीतिक महत्व।
विश्लेषकों का कहना है कि आज के वैश्विक परिदृश्य में व्यापार समझौते केवल आयात-निर्यात तक सीमित नहीं रह गए हैं।वे कूटनीति, प्रभाव और वैश्विक शक्ति संतुलन के महत्वपूर्ण साधन बन चुके हैं। भारत–अमेरिका समझौता भी इसी व्यापक रणनीतिक सोच का हिस्सा माना जा रहा है।
टैरिफ विवाद और तनाव।
पिछले कुछ समय से दोनों देशों के बीच टैरिफ विवाद और नीतिगत मतभेदों के कारण व्यापारिक संबंधों में कुछ तनाव देखने को मिला था।ऐसे में यह पहल संबंधों को स्थिर और मजबूत बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है,ताकि आर्थिक मतभेद दीर्घकालिक समस्या में न बदलें।
किसी एक देश पर निर्भरता से बचने की नीति।
भारत की नीति स्पष्ट रूप से बहुपक्षीय संबंधों पर आधारित बताई जा रही है। अमेरिका के साथ व्यापार बढ़ाने के बावजूद भारत यूरोप और अन्य देशों के साथ भी आर्थिक संबंध मजबूत कर अपने विकल्पों को विस्तृत करना चाहता है। इससे वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
अर्थशास्त्रियों के अनुसार इस तरह के समझौते से भारत को कई संभावित लाभ मिल सकते हैं,जैसे—
विदेशी निवेश में वृद्धि
नई तकनीक और आधुनिक उद्योगों का विकास
वैश्विक बाजार में भारत की मजबूत उपस्थिति
रोजगार और विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा
ऊर्जा नीति में संतुलित दृष्टिकोण
नीतिगत स्तर पर भारत ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल आयात पर निर्भरता को अचानक समाप्त करना व्यावहारिक नहीं है,इसलिए संतुलित और क्रमिक परिवर्तन की रणनीति अपनाई जा रही है।
वैश्विक मंच पर भारत की छवि मजबूत।
कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि संवाद और समझदारी के जरिए मुद्दों को सुलझाने की भारत की नीति ने उसे एक जिम्मेदार और विश्वसनीय वैश्विक साझेदार के रूप में स्थापित किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत–अमेरिका व्यापार समझौते को “किसी की जीत या हार “के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।यह एक दूरदर्शी रणनीतिक कदम है, जिसका उद्देश्य भारत की आर्थिक और वैश्विक स्थिति को मजबूत करना,भविष्य के विकल्पों को सुरक्षित करना और बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में संतुलित नीति के साथ आगे बढ़ना है।

