अधीक्षक के आगे कोई कीमत नहीं कमिश्नर के आदेश की।

ताज ख़ान
नर्मदापुरम//
नर्मदापुरम ज़िला मुख्यालय जो संभागीय मुख्यालय भी है उसी से सटे हुए नर्मदापुरम विधानसभा का इटारसी शहर जो हमेशा स्वस्थ अव्यवस्थाओं को लेकर सुर्खियों में रहता है,जिसे डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी शासकीय चिकित्सालय के नाम से भी जाना जाता है, वैसे तो हर बार डॉक्टर की कमी,साधनों की कमी,कभी गलत तरीके से इलाज तो कभी अव्यवस्थाओं को लेकर काफी बार शोर शराबा हो चुका है,लेकिन इस बार तो सीधे-सीधे संभागआयुक्त (कमिश्नर) के आदेशों की अनदेखी का मामला सामने आया है,ज्ञात हो की नर्मदापुरम संभागायुक्त के.जी तिवारी ने समीक्षा बैठकों में लगातार शासकीय भवन को लेकर कहा की अगर सेवानिवृत हो चुके शासकीय अधिकारी कर्मचारी शासकीय में निवासरत हो तो उक्त भवनों को खाली करवा कर कार्यरत कर्मचारियों,अधिकारियों को दिए जाने की बात कही है। कमिश्नर ने तो यहां तक कठोर शब्दों में कह चुके हैं कि अगर शासकीय कर्मचारी भवनों को खाली नहीं करते हैं तो उन पर आर्थिक दंड लगाया जाए।इन सब फरमानों का इटारसी सरकारी अस्पताल के अधीक्षक आर.के.चौधरी द्वारा अनदेखी की जा रही है। इस संबंध में 16/10/2025 को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारीयों ने कमिश्नर नर्मदापुरम संभाग के नाम ज़िलाधीश एवं मुख्य ज़िला चिकित्सा अधिकारी डॉ.नरसिंह गहलोत को आवेदन देकर अपनी व्यथा बताई।शासकीय चिकित्सालय इटारसी में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी एवं सफाई कर्मचारियों ने अपने आवेदन में बताया कि सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारी राजू और ओमप्रकाश वल्द रामावतार कुशवाहा उम्र 65 वर्ष,एवं भरत राव,अजय विश्वकर्मा,माखन (भ्रत) की मां,पप्पू केवट,दिलीप केवट,कल्लू,एवं राजेश मेहरा,जो कि मरीजों को ठेकेदार के अनुसार खाना वितरित करते हैं,यह सभी लोग सेवा मुक्त हो चुके हैं,एवं अपने संबंधियों के साथ शासकीय भवन में निवासरत हैं,जिसमें कुछ वार्डबाय स्वीपर हैं,जिनके स्वयं के निवास होते हुए भी अपना मकान किराए पर चला रहे हैं,और शासकीय आवास में रहकर फ्री की रबड़ी खा रहे हैं,जो शासकीय संपत्ति नल,जल, बिजली,का दुरुपयोग कर शासन को आर्थिक क्षति पहुंचा रहे हैं,जबकि नगर पालिका के पूर्व सीएमओ द्वारा जर्जर भवनों को निवास आयोग घोषित किया जा चुका है।यह सभी लोग अस्पताल अधीक्षक आर.के.चौधरी के संरक्षण में अवैध रूप से बिना किसी शुल्क अदा किये आवास,पानी,बिजली,का दुरुपयोग कर शासन को आर्थिक हानि पहुंचा रहे हैं।इसकी सूचना आवेदकों ने मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी को भी दी है,जिस पर अधिकारी द्वारा मौखिक रूप से कार्यवाही करने को निर्देशित भी किया गया था।इन सबके बावजूद आज दिनांक तक अधीक्षक ने कोई कार्रवाई नहीं की है।यह दर्शाता है कि शासन की नाक के नीचे खुल्लम खुल्ला भ्रष्टाचार किया जा रहा है,और अधीक्षक चौधरी द्वारा अपने ही वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश को कचरे के डिब्बे में डाल दिया गया है।इस संबंध में जब जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी के मोबाइल नंबर 777 3803135 पर बात करनी चाहि तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।

 

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