EPFO की वेबसाइट बार-बार हो रही डाउन, यूज़र्स परेशान – सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
नई दिल्ली: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की वेबसाइट बीते कुछ हफ्तों से बार-बार डाउन हो रही है, जिससे लाखों यूज़र्स को पासबुक देखने, मोबाइल नंबर अपडेट करने और OTP प्राप्त करने जैसी सेवाओं में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
📉 सिस्टम डाउन, सेवा ठप
कई यूज़र्स ने ट्विटर (अब X) पर स्क्रीनशॉट साझा कर बताया कि EPFO पोर्टल या तो खुलता नहीं है या फिर सर्वर एरर दिखाता है। कुछ यूज़र्स को पासबुक खोलने में एक घंटे से ज़्यादा का इंतज़ार करना पड़ा। OTP आने में देरी और UAN लॉगिन असफल होने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं।
💬 सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएँ
यहाँ देखें कुछ यूज़र्स की नाराज़गी भरी प्रतिक्रियाएँ:
📸 @neilborett
“EPF 3.0 कहां है? 320 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन वेबसाइट तो ढंग से लोड भी नहीं होती। डिजिटल इंडिया या डिजास्टर इंडिया?”
📸 @rahul4finance
“पासबुक खोलने की कोशिश कर रहा हूं – 40 मिनट से घूमा ही जा रहा है। सर्वर डाउन है या सिस्टम ही बैठ गया?”
📸 @preetiinvests
“सरकार ने जब से पोर्टल अपडेट किया है, तब से UAN लॉगिन करना ही नामुमकिन हो गया है। सिर्फ प्रचार से काम नहीं चलेगा।”
🧾 EPFO की सफाई: वैकल्पिक सुविधाएँ मौजूद
EPFO ने फिलहाल SMS और मिस्ड कॉल सेवा को प्राथमिक विकल्प के रूप में सुझाया है:
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SMS से बैलेंस जानें: EPFOHO <UAN> HIN भेजें 7738299899 पर
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मिस्ड कॉल सेवा: 9966044425 पर मिस्ड कॉल करें (UAN और आधार लिंक होना चाहिए)
हालांकि यह समाधान अस्थायी हैं, लेकिन डिजिटल सेवाओं पर भरोसा रखने वाले यूज़र्स के लिए ये काफी नहीं हैं।
💸 सवालों के घेरे में ₹320 करोड़ का पोर्टल
सोशल मीडिया यूज़र्स ने EPFO के “EPF 3.0” पोर्टल पर हुए ₹320–₹340 करोड़ खर्च पर भी सवाल खड़े किए हैं। कईयों ने पूछा कि इतना निवेश होने के बाद भी वेबसाइट इतने सामान्य कार्यों के लिए भी क्यों फेल हो रही है?
🔍 तकनीकी विशेषज्ञों की राय
तकनीकी जानकारों का मानना है कि EPFO की वेबसाइट पर बैकएंड परफॉर्मेंस टेस्टिंग और क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर गंभीर खामियां हैं। “ऐसे पोर्टल जो करोड़ों कर्मचारियों की फाइनेंशियल जानकारी रखते हैं, उन्हें 99.9% अपटाइम के साथ चलना चाहिए,” एक विशेषज्ञ ने कहा।
🛑 निष्कर्ष
EPFO की वेबसाइट पर चल रही यह तकनीकी अस्थिरता सिर्फ तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि भरोसे और पारदर्शिता का सवाल बन चुकी है। डिजिटल इंडिया के दावे तभी सच्चे साबित होंगे जब सरकारी पोर्टल्स आम लोगों की ज़रूरतों पर खरे उतरें।
