ताज ख़ान
नर्मदापुरम//
मतदाता सूचियों की शुद्धता और पारदर्शिता: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की एक व्यापक समीक्षा।
1-चुनावी शुद्धता का महाअभियान:भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से मतदाता सूचियों में पारदर्शिता और सटीकता को नया आयाम।
2-युवाओं की रिकॉर्ड भागीदारी:24 जून 2025 से अक्टूबर 2026 के बीच देश भर में 2.37 करोड़ नए जेन जी (Gen Z) मतदाता जुड़े।
3-व्यापक प्रशासनिक एवं न्यायिक सुरक्षा:सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत पारदर्शी सुनवाई,बूथ लेवल एजेंटों (BLAs) की सक्रिय भूमिका और तकनीकी सुरक्षा उपायों से लोकतंत्र मजबूत।
SIR क्या है और इसकी आवश्यकता क्यों है ?
मतदाता सूचियों की सटीकता और विश्वसनीयता किसी भी लोकतांत्रिक देश की रीढ़ होती है।नियमित संक्षिप्त पुनरीक्षण के विपरीत, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) एक विस्तृत अभ्यास है जिसमें मौजूदा प्रविष्टियों का गहन सत्यापन किया जाता है। इसके तहत यह सुनिश्चित किया जाता है कि मतदाता जीवित हैं, अपने वर्तमान पते पर सामान्य रूप से निवास कर रहे हैं और उनका नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज (दोहरा पंजीकरण) नहीं है।
संविधान के अनुच्छेद 324 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21(3) के तहत ECI को यह अधिकार प्राप्त है। दशकों से शहरीकरण, बड़े पैमाने पर पलायन और मृत मतदाताओं की रिपोर्ट समय पर न मिलने के कारण डेटाबेस में विसंगतियां आ जाती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने फैसलों में SIR के इस वैध उद्देश्य को सही ठहराया है, जिससे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित हो सकें।
सुरक्षा उपाय और समावेशिता
सटीकता के साथ-साथ हर पात्र नागरिक के मताधिकार की रक्षा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ECI और जिला प्रशासन द्वारा निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं।
घर-घर सत्यापन!
बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) द्वारा घर-घर जाकर दस्तावेज एकत्र करना और उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करना।
विशेष सहायता डेस्क !
गरीब नागरिकों,मजदूरों और रैन बसेरा निवासियों के लिए विशेष शिविर और सहायता डेस्क स्थापित करना।
राजनीतिक दलों की सहभागिता!
देश भर में 20 लाख से अधिक बूथ स्तर के एजेंटों (BLAs) द्वारा पंजीकरण प्रक्रिया का ऑडिट।
पारदर्शिता !
चुनाव के दिन मतदान केंद्रों पर 100% वेबकास्टिंग और कड़े तकनीकी सुरक्षा उपाय (जैसे EVM और VVPAT की स्वतंत्र व्यवस्था)।
वर्तमान स्थिति और आगे की राह बिहार,पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में यह प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है,और अन्य राज्यों में चरण-वार तरीके से जारी है।ड्राफ्ट विलोपन में मृत या पलायन कर चुके लोगों के नाम हटने से प्रक्रिया पर सवाल तो उठे, लेकिन ECI और न्यायपालिका के बीच समन्वय ने यह साबित कर दिया है कि सटीक सूचियाँ और गलतियों को सुधारने की प्रभावी प्रक्रिया ही चुनावी विश्वसनीयता की असली कसौटी है।
