जमुनिया ग्राम पंचायत में लाखों के भुगतान पर उठे सवाल, ग्रामीणों को जानकारी नहीं होने का आरोप
पंचायत पोर्टल पर दर्ज अलग-अलग भुगतानों को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी, 2 अक्टूबर की ग्रामसभा में मुद्दा उठाने की तैयारी
जमुनिया। ग्राम पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों और उनके भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए शासन स्तर पर पंचायत पोर्टल और ऑनलाइन सॉफ्टवेयर की व्यवस्था की गई है। इन माध्यमों के जरिए पंचायत के कार्यों, स्वीकृत राशि और किए गए भुगतानों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। हालांकि, जमुनिया ग्राम पंचायत में ऑनलाइन दर्ज किए जा रहे विभिन्न भुगतानों को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में किस कार्य के लिए कितनी राशि का भुगतान किया जा रहा है, इसकी जानकारी उन्हें नियमित रूप से नहीं मिलती।
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत पोर्टल पर जब कुछ भुगतानों की जानकारी सामने आई तो एक ही नाम से अलग-अलग कार्यों के लिए कई भुगतान दर्ज दिखाई दिए। मीडिया द्वारा पंचायत पोर्टल से उपलब्ध कुछ बिलों और भुगतान संबंधी जानकारियों को ग्रामीणों के समक्ष रखा गया। ग्रामीणों ने इन भुगतानों की जानकारी होने से अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि उन्हें कई कार्यों और उनके भुगतान के संबंध में मौके पर जानकारी नहीं मिलती।
ग्रामीण बोले- पंचायत में क्या हो रहा है, जानकारी नहीं मिलती
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में होने वाले कार्यों, उनकी लागत, भुगतान और संबंधित एजेंसी अथवा व्यक्ति की जानकारी सार्वजनिक रूप से ग्रामीणों को नियमित रूप से नहीं बताई जाती। उनका कहना है कि ऑनलाइन पोर्टल की जानकारी तकनीकी रूप से उपलब्ध होना अलग बात है और प्रत्येक ग्रामीण द्वारा उसे देख पाना अलग। ग्रामीणों के मुताबिक अधिकांश लोग पोर्टल पर जाकर भुगतान की जानकारी निकालने की प्रक्रिया से परिचित नहीं हैं।
ग्रामीणों ने पंचायत सचिव की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पूर्व सचिव भी कभी-कभार पंचायत में आते थे और वर्तमान सचिव की उपस्थिति भी नियमित नहीं रहती। इसके चलते पंचायत संबंधी कार्यों के लिए ग्रामीणों को ग्राम रोजगार सहायक से संपर्क करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत के वित्तीय लेन-देन और विकास कार्यों से संबंधित जानकारी उन्हें पंचायत स्तर पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
पोर्टल पर दर्ज भुगतान की जांच की मांग
ग्रामीणों द्वारा सामने रखी गई जानकारी में अलग-अलग कार्यों के नाम पर किए गए कई भुगतानों का उल्लेख है। हालांकि, किस भुगतान के पीछे वास्तविक कार्य हुआ या नहीं, कार्य की गुणवत्ता क्या है और भुगतान नियमानुसार किया गया या नहीं—इन सभी बिंदुओं की स्वतंत्र जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
इसलिए ग्रामीणों ने पंचायत के भुगतान की बिल, वाउचर, माप पुस्तिका, कार्यादेश, स्वीकृति, स्थल पर हुए वास्तविक कार्य और भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्ति/फर्म के स्तर पर जांच किए जाने की मांग उठाई है। यदि रिकॉर्ड में भुगतान हुआ है तो संबंधित कार्यों का भौतिक सत्यापन भी महत्वपूर्ण होगा।
विकास कार्य या वित्तीय अनियमितता, ग्रामसभा में उठेगा सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में होने वाले विकास कार्यों का विरोध नहीं है, लेकिन विकास कार्यों में पारदर्शिता और ग्रामीणों की भागीदारी जरूरी है। यदि किसी कार्य पर राशि खर्च की गई है तो ग्रामीणों को यह पता होना चाहिए कि कार्य कहां हुआ, कितनी राशि स्वीकृत हुई, कितना भुगतान किया गया और कार्य की वर्तमान स्थिति क्या है।
इसी बीच 2 अक्टूबर को प्रस्तावित ग्रामसभा को लेकर ग्रामीणों में विशेष चर्चा है। ग्रामीणों ने संकेत दिया है कि ग्रामसभा में पंचायत के कार्यों और भुगतानों से संबंधित अपनी आपत्तियां रखी जाएंगी तथा संबंधित रिकॉर्ड और भुगतान की जानकारी सार्वजनिक किए जाने की मांग की जाएगी।
ग्रामसभा में रखे जा सकते हैं ये प्रमुख सवाल
ग्रामीणों के अनुसार ग्रामसभा में मुख्य रूप से यह पूछा जा सकता है कि—
पंचायत में पिछले समय में कुल कितनी राशि के भुगतान किए गए?
किन-किन कार्यों के लिए भुगतान किया गया और कार्य स्थल कहां हैं?
एक ही व्यक्ति/फर्म के नाम पर कितने भुगतान किए गए?
प्रत्येक भुगतान के पीछे संबंधित कार्य का कार्यादेश और स्वीकृति क्या है?
भुगतान से पहले कार्य का भौतिक सत्यापन किस अधिकारी ने किया?
माप पुस्तिका में कार्य की कितनी मात्रा दर्ज है?
जिन कार्यों का भुगतान हो चुका है, क्या वे वास्तव में मौके पर मौजूद हैं?
पंचायत के आय-व्यय और भुगतान की जानकारी ग्रामसभा के समक्ष क्यों नहीं रखी गई?
पंचायत सचिव की नियमित उपस्थिति और पंचायत कार्यालय के संचालन की स्थिति क्या है?
अब निगाहें 2 अक्टूबर की ग्रामसभा पर हैं। यदि ग्रामीण इन मुद्दों को औपचारिक रूप से ग्रामसभा में रखते हैं और प्रस्ताव पारित किए जाते हैं, तो पंचायत के संबंधित रिकॉर्ड की जांच और भौतिक सत्यापन से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दर्ज भुगतान वास्तविक विकास कार्यों से संबंधित हैं अथवा कहीं वित्तीय अनियमितता हुई है।
> नोट: किसी भुगतान को केवल पोर्टल पर दर्ज होने या ग्रामीणों के आरोप के आधार पर भ्रष्टाचार कहना उचित नहीं होगा। वास्तविक स्थिति निर्धारित करने के लिए संबंधित पंचायत रिकॉर्ड, कार्यस्थल के भौतिक सत्यापन और सक्षम प्रशासनिक जांच के निष्कर्ष आवश्यक होंगे।










