ताज ख़ान
नर्मदापुरम//
नर्मदापुरम शहर की राजनीति फिर एक बार गर्माती नज़र आ रही है,लेकिन इस बार राजनीति के साथ-साथ नगर के हितों की भी बात की जा रही है।
क्या है मामला,क्या है आपत्ति।
मामला जल संसाधन विभाग के कार्यालय नर्मदापुरम में श्रीमंत माधव राव सिंधिया की मूर्ति स्थापित करने का है,जिसमें न्यायालय नजूल अधिकारी नगर जिला नर्मदापुरम ने इश्तिहार जारी कर अवगत करवाया कि मुख्य नगर पालिका अधिकारी नर्मदापुरम के द्वारा पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीमंत माधवराव सिंधिया की प्रतिमा स्थापित किए जाने के संबंध में पत्र प्राप्त हुआ है,पत्र अनुसार मूर्ति मीनाक्षी चौक नर्मदापुरम जल संसाधन विभाग के कार्यालय में लगाना प्रस्तावित किया है।इस संबंध में माधव ज्योति अलंकरण समारोह समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह ठाकुर ने भी कार्यालय परिसर में मूर्ति स्थापित करने का निवेदन किया है,तत् संबंध में कार्यालय कार्यपालन यंत्री तवा परियोजना संभाग इटारसी ने पत्र द्वारा 25/09/2025,को जल संसाधन विभाग की भूमि पर मूर्ति लगाने की अनुशंसा भी कर दी है,जो न्यायालय में विचाराधीन है।
मामले ने पकड़ा तूल।
इस मामले ने फिर एक बार तूल पकड़ लिया है।समाज सेवी रमेश रैकवार,एवं राजेन्द्र वर्मा निवासी नर्मदापुरम ने उक्त इश्तिहार पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि इश्तहार में यह स्पष्ट उल्लेख नहीं है कि किस शीट नंबर पर और किस स्थान पर मूर्ति स्थापित होना है।इश्तिहार में चारों दिशाओं का उल्लेख नहीं किया गया है।मीनाक्षी चौक को तो वैसे भी बड़ी मुश्किल से व्यवस्थित करने की कवायद की गई,वहां स्थित मंदिर को भी स्थानांतरित किया गया,उक्त क्षेत्र में वैसे ही यातायात का बहुत दबाव रहता है।अब अगर दोबारा यहां मूर्ति स्थापित होती है तो आम जनता को आवागमन में भविष्य में भी तकलीफें झेलनी पड़ेंगी,और माननीय उच्च न्यायालय ने अपनी याचिका क्रमांक डब्लू पी 24323/2019 के आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया है कि सार्वजनिक स्थान पर जो लोक उपयोग के लिए हो वहां मूर्ति स्थापित नहीं की जानी चाहिए।
पूर्व ज़िला पंचायत अध्यक्ष ने क्या कहा ।
ज्ञात हो उक्त मामले की गंभीरता को देखते हुए समाजसेवी एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष भवानी शंकर शर्मा ने भी मुख्य नगर पालिका अधिकारी को पत्राचार कर अपना विरोध जताया था।श्री शर्मा ने भी उच्च न्यायालय जबलपुर के आदेश का हवाला देते हुए बताया था कि शासकीय भूमि पर किसी की भी मूर्ति नहीं लग सकती,अगर यह आदेश को नहीं माना जाता है तो यह न्यायालय की अवमानना का कैस होगा,और नपा पर अवमानना की कार्रवाई की जाएगी।अगर मूर्ति लगाना ही चाहते हैं तो समाजसेवी अथवा राष्ट्रीय स्तर के महान नेता की क्यों नहीं ?जैसे अटल बिहारी वाजपेई,हरि विष्णु कामत ,अथवा राजमाता विजय राजे सिंधिया,भी हो सकते हैं।लेकिन हमारे शहर के हित में यह सही है कि किसी की भी मूर्ति सार्वजनिक स्थल पर नहीं लगना चाहिए।अगर कोई इससे राजनीतिक या आर्थिक फायदा लेना चाहता है,तो वह अपनी स्वयं की व्यक्तिगत भूमि पर बहुत शौक से मूर्ति लगवाए।जिसकी उचित रूप से देखभाल भी हो सकेगी और शहर भी अव्यवस्थित नहीं होगा।

