प्रकृति का चमत्कार: नर्मदापुरम में श्रद्धा की ‘कलम’ से खिला ‘ब्रह्म कमल’,एक साल में 5वीं बार हुए दर्शन।

ताज ख़ान
नर्मदापुरम//
स्थानीय रिवर कॉलोनी मालाखेड़ी में इन दिनों भक्ति और कौतूहल का अद्भुत माहौल है।यहाँ रहने वाले बैंक अधिकारी सी बी खरे और श्रीमती प्रीति खरे के निवास पर ईश्वरीय कृपा और 13 वर्षों की कठिन तपस्या का प्रतिफल एक दुर्लभ फूल के रूप में दिखाई दिया है। हिमालय की दुर्गम कंदराओं में खिलने वाला’ब्रह्म कमल’ यहाँ न केवल खिला है, बल्कि अपनी उपस्थिति से विज्ञान और मान्यताओं को भी चकित कर दिया है।
13 वर्षों का धैर्य और ईश्वरीय चमत्कार,आमतौर पर यह माना जाता है कि ब्रह्म कमल का फूल 10 से 12 साल के लंबे अंतराल में केवल एक बार खिलता है।लेकिन खरे परिवार की निस्वार्थ सेवा और भक्ति ने इस धारणा को एक “सुखद चमत्कार” में बदल दिया है।श्री खरे ने बताया कि पिछले 13 वर्षों से उन्होंने इस पौधे की देखभाल एक नन्हे बालक की तरह की है।उनकी इसी 13 साल की लंबी प्रतीक्षा के बाद,भगवान की ऐसी असीम कृपा हुई कि एक ही वर्ष के भीतर रिकॉर्ड 5वीं बार ब्रह्म कमल खिलकर अपनी पंखुड़ियां बिखेर चुका है।
नियमित सेवा:
समय पर जल,उचित खाद और पौधों के अनुकूल वातावरण तैयार करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहा।पारिवारिक जुड़ाव: उन्होंने बताया कि जब आप प्रकृति को परिवार का हिस्सा मान लेते हैं,तो प्रकृति भी आपको अपना आशीर्वाद देती है।

दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब।
जैसे ही कॉलोनी में ब्रह्म कमल के एक ही साल में पांचवीं बार खिलने की सूचना फैली,श्रद्धालुओं और प्रकृति प्रेमियों का तांता लग गया।लोग इसे साक्षात भगवान ब्रह्मा का आशीर्वाद और चमत्कार मानकर दर्शन करने पहुँच रहे हैं।रात के अंधेरे में अपनी सफेद आभा बिखेरने वाले इस पुष्प की सुगंध ने पूरे परिसर को महका दिया है।

*_ब्रह्म कमल: क्यों है यह इतना खास?_*
हिमालय का रत्न: यह मुख्य रूप से 11,000 से 15,000 फीट की ऊंचाई पर पाया जाता है।मैदानी इलाकों के गर्म वातावरण में इसे खिलाना खरे परिवार की मेहनत का प्रमाण है।
रात का वैभव: यह केवल रात में खिलता है और कुछ ही घंटों के लिए पूर्ण विकसित रहता है।सूर्योदय से पहले इसकी पंखुड़ियां मुरझा जाती हैं।

धार्मिक महत्ता:

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार,यह सौभाग्य और सुख-समृद्धि का प्रतीक है। 13 साल के इंतजार के बाद एक ही साल में 5 बार दर्शन देना परिवार के लिए बड़ी आध्यात्मिक उपलब्धि मानी जा रही है।

खरे परिवार का यह अनुभव सिखाता है कि यदि हम धैर्य,प्रेम और अटूट विश्वास से प्रकृति की सेवा करें,तो वह असंभव को भी संभव कर दिखाती है।10-12 साल में एक बार खिलने वाले फूल का एक ही साल में बार-बार खिलना वाकई किसी चमत्कार से कम नहीं है।

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