खाने के बाद बचे हुए नमक में पानी डालने की परंपरा हमारे समाज में कई कारणों से जुड़ी मानी जाती है—कुछ वैज्ञानिक, कुछ धार्मिक और सांस्कृतिक। सरल शब्दों में समझिए
🔬 1. वैज्ञानिक/व्यावहारिक कारण
नमक नमी खींचने वाला (हाइग्रोस्कोपिक) होता है।
खुले में पड़ा नमक सूखापन, गर्मी या नकारात्मक गंध फैलाने वाला माना जाता था।
उसमें पानी डालने से नमक निष्क्रिय हो जाता है और दोबारा उपयोग योग्य नहीं रहता, जिससे स्वच्छता बनी रहती है।
🕉️ 2. धार्मिक मान्यता
हिंदू परंपरा में नमक को लक्ष्मी और ऊर्जा से जोड़ा जाता है।
माना जाता है कि जूठा नमक नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है।
उसमें पानी डाल देने से वह ऊर्जा शांत हो जाती है।
🧿 3. नज़र व नकारात्मक प्रभाव से बचाव
पुराने समय में विश्वास था कि खाने के बाद बचा नमक अगर खुला रह गया तो उस पर बुरी नज़र या नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
पानी डालने से यह प्रभाव समाप्त हो जाता है।
🌱 4. प्रकृति के प्रति सम्मान
नमक को अन्न का हिस्सा माना गया है।
उसे यूँ ही फेंकना या खुला छोड़ना अनादर माना जाता था, इसलिए पानी डालकर उसे धरती में मिला दिया जाता है।
